MediaManch-No.1 News Media Portal
अपनी ख़बर मीडिया मंच को भेजें

मेल आई डी: newsmediamanch@gmail.com
News Flash                  आप अपनी खबर newsmediamanch@gmail.com पर मेल करें।    
MediaManch-No.1 News Media Portal
मीडिया मंच टॉप 20
उदाहरण
"वो गाली दे रहा था रहा लेकिन मैं ले नहीं रहा था "
विस्तार से
यादें
'सनसनी' के १० साल
विस्तार से
अनुभव
बहुत नाशुक्रा काम है समीक्षा करना
विस्तार से
वार्षिक फ़िल्म समीक्षा
साल 2013-मेरी पसंद की 12 फिल्में -अजय ब्रह्मात्‍मज
विस्तार से
न्यूज़ ज़ोन
नवभारत टाइम्स
बीबीसी हिंदी
नईदुनिया
हिंदुस्तान दैनिक
प्रभात ख़बर
दैनिक भास्कर
दैनिक जागरण
अमर उजाला
सिनेमा टीवी धारावाहिक
तोहसे इ उम्मीद ना रहिल रे पीके !( Date : 30-12-2014)

पीके देखी। एक साहसिक फिल्म। देखकर सोंचने पर मज़बूर हुआ की असल में हमारे भगवान दिखते कैसे हैं ? जैसा हमारे रॉन्ग नंबर दिखाते हैं वैसे  या किसी और सूरत या सीरत के हैं हमारे भगवान। फिर सोंचा ऐसे ही होते तो अब तक लड़ झगड़ के अलग अलग ग्रह बना लिए होते, एक हिन्दू ग्रह  एक मुस्लिम ग्रह वगैरह वगैरह। पर ऐसा है नहीं वो जैसे मिल झूल  कर रहते हैं, हम लाख कोशिशों के बाद भी नहीं रह पाते। इसलिए पीके तेरी बातों में दम तो था। पर तुम्हारे तरीके से मैं इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता हूँ। तुम दूसरे ग्रह से आये हो, अगर हम तुम्हारी इस बात पर भरोसा कर सकते हैं। तो  ईश्वर के दर्शन भी होगे इस बात को मान लेने में परहेज़ क्यों? असल में पीके, तुम पूरी रिसर्च किये नहीं या जगत जननी उर्फ़ जग्गू  ने करने नहीं दी।  दोस्त धर्म और आस्था दो अलग अलग  बातें हैं। धर्म हमारी प्रतिज्ञा है और आस्था उस प्रतिज्ञा को दृढ़ रख पाने की कोशिश। और यह अपनी अपनी कोशिश का मामला है दोस्त।  किसी की कोशिश अज़ान में है, तो किसी की आरती में। किसी की कुरान में तो किसी की गीता में। किसी की बाइबल तो किसी की गुरुग्रंथ साहिब  में। कोई झुक कर अपनी कोशिश पूरी करता है तो कोई सूर्य नमस्कार करके। किसी को साकार में विश्वास है तो किसी को निराकार में।  सच तो यह ही है की हममे से किसी ने उसको नहीं देखा है। सब फोन मिलाने की कोशिश कर रहें हैं।  किसी का राइट नंबर लगता है किसी का रॉन्ग नंबर मिल जाता है। 

बस यहीं पर तुम अति उत्साही हो गए पीके। तुमने  झटके में सबको रॉन्ग नंबर बता डाला। तुम मैथ्स के सताए उस स्टूडेंट की तरह हो जो अपने बाप को कन्वेंस कर रहा है की आर्ट इस द बेस्ट वे टू स्कोर हाईएस्ट मार्क्स। मैथ्स को समझने की बजाय उसे निरर्थक साबित कर दिया।  सब रॉंग नंबर नहीं होते पीके।  हमें राइट नंबर मिलने तक कोशिश जारी रखनी होती है। काश तुम राइट और रॉन्ग का अंतर समझा पाते। मैं तुम्हारा विरोध नहीं करता ना ही तुम्हारा बहिष्कार करूँगा।  मैं इंतज़ार करुगा किसी और समझदार पीके  के आने का। अन्धविश्वास पर प्रहार करते करते न जाने कब तुमने हमारी आस्था पर चोट कर दी। पर कोई बात नहीं, मेहमान जो ठहरे।  और हाँ पीके, हमार गोला मा मेहमान भगवान बराबर होवत है।


संयम समीर श्रीवास्तव 
New Delhi
सिनेमा टीवी धारावाहिक



First << 1 2 3 4 5 >> Last



नमूना कॉपी पाने या वार्षिक सदस्यता के लिए संपर्क करें +91 9860135664 या samachar.visfot@gmail.com पर मेल करें.
Media Manch
मीडिया मतदान
Que.



Result
MediaManch-No.1 News Media Portal